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दिल्ली काँग्रेस के गिरे मनोबल को चौधरी अनिल ने दी नई जान

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में अलग अलग पार्टी की सरकारों का बनना देश की प्रगतिशीलता, विकासशीलता के लिए एक अलग ढंग का कार्य या जनता की उम्मीद है। आज देश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जिसने अपने आप को इतना सशक्त बनाकर उभारा है कि आज देश की सबसे बड़ी पार्टी काॅग्रेस पार्टी जिसने देश को अपने कई दिग्गज नेताओं के बल पर 60-70 सालों की सेवाये दी, किंतु कुछ नेतागण या जनतागण इस सेवाकाल को राजकाल के नाम से संबोधित करती है मैं यहां किसी के शब्दों या वाक्यों को ठीक करने के लिए नही हूं, जिसमें जितना ज्ञान होगा उतना समझेगा वाली कहावत पर अडिग रहना चाहता हूं ।
पिछले कुछ दशकों से काॅग्रेस के कुछ नेताओं या उनके द्वारा बनाई गई नीतियां जो जनता के हलक से नीचे नही उतर पाई को अपना पद दूर-दूर तक नही दिखाई देता, जिसका एक दृृश्य दिल्ली विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में देखा गया।
आज बेशक काॅंग्रेस अपने निचले कदम पर है पर उसने आज फिर से अपनी नई तरीके की राजनीति में सुगबुगाहट पैदा कर दी है जैसे कि किसी भी पार्टी को चलाने के लिए उसकी नीतियां, नेतागण, और उनकी सोच पर निर्भर होना पड़ता है तभी जाकर एक पार्टी चलती है। अगर दिल्ली में काॅंग्रेस की बात करें तो एक ऐसा शख्स नज़र आता है या अगर कुछ यूं कहे कि काॅंग्रेस की अमावस रात को चीरते हुए एक सूर्य का उदय हो चुका है जिससे काॅंग्रेस पर लगा बरसों का ग्रहण हट गया है यहां जब राजनीति अपने निचले दर्ज़ पर पहुंच चुकी है तो इस सूर्य के उद्वरण से मानों काॅंग्रेस के मुख पर से घटा के बादल छट गए हो। इस सूर्य रूपी इंसान को जनता चौधरी अनिल कुमार के नाम से जानती है। पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र का यह कर्मठ व्यक्ति कभी पूर्व विधायक के रूप में तो कभी समाज सेवक के रूप में रहकर लोगो की सेवा करता नज़र आता है जोकि एक गज़ब व्यक्तित्व का धनी है। चौधरी अनिल को हाल ही में काॅंग्रेस पार्टी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है हाॅलाकि काॅंग्रेस आलाकमान को समझने में देरी हुई पर देर आए दुरस्त आए वाली कहावत सोने पर सुहागा का काम करती है। पद को सभालने का वक्त भी देखिए कि जब कोरोना जैसी महामारी पूरे विश्व में फैली है और विश्वस्तर के नेताओं और उनकी सरकारों का अपनी पार्टी के सूर्य अस्त होने की चिंता सता रही है तो ऐसा लगता है ईश्वर भी इस व्यक्ति की एक परीक्षा और लेना चाहते हो। पद की गरिमा को बचाने काॅंग्रेस को पुनः जीवित करने, उसकी साख को सजोंए रखना ऐसे कितने ही दबाव और चुनौतियों के बीच अनिल चौधरी ने यह पद स्वीकार किया होगा।
काॅंग्रेस पार्टी ऐसी कितनी ही नीतियों को चला रही है जिनमे आओ मदद को हाथ बढ़ायें रसोई चलायें और कोरोना के सिपाही करेंगें कोरोना की धुलाई को इस व्यक्ति ने जिस तरह से अंजाम दिया है वह क़ाबिल ऐ तारीफ है और इन कार्यों से खासकर इनके क्षेत्र की जनता की मानों आखं पर से जाला हटने लगा है हर कोई अपने इस नेता को चाहता है।




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