प्रवासी मजदूरों के हालात पर सिकती राजनितिक रोटियां

ग़ाज़ीपुर : आज जिसे देखो वो कोरोना की बात करता है सभी कोरोना से कितने परेशान है, सरकार ने अपनी बुद्विमता के हिसाब से कार्य किया या यूं कहें कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने अपनी पूर्ण बुद्विमता के आधार पर निर्णय लिये कि कोरोना 21 दिन के बाद चला जाएगा, कुछ सवाल अंतर आत्मा को कौंध जाते है लाॅकडाउन 1, 21 दिन, लाॅकडाउन 2, 15 दिन, लाॅकडाउन 3 फिर 15 दिन और अब लाॅकडाउन 4 में आ गये है पर कोरोना है कि अपनी जालसाजी से मानने का नाम नहीं ले रहा जब विकसित देशों का बुरा हाल है तो हमारा देश तो विकासशील देशों की श्रेणी में आता है ऐसी ही तमाम दलीलें हमारे नेतागण फिर चाहे वो पक्ष के हो या फिर विपक्ष के अलग अलग चैनल पर देते नज़र आएगें किंतु करोना तो एक वायरस है वो अमीर गरीब, छोटे बड़े की नीति पर नही चलता वो फर्क करना जानता ही नहीं लेकिन राजनीतिक पार्टीयों ने अपने अपने तरीके से अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में कोई कमी नहीं छोड़ी। कोरोना ने किसी भी वर्ग को नही छोड़ा आज उसने हर वर्ग पर ऐसी छाप छोड़ी है कि जो उससे बच गए वो अपनी आने वाली पीढ़ियों को इसकी कहानी सुनायेगें और जो नही बच पाये उनके पीछे का परिवार उनकी कहानी सुनायेगा।
आज हर मीडिया चैनल जिस वर्ग पर कोरोना की सबसे अधिक मार पड़ी उस मजदूर वर्ग की बात कर रहा है, बड़ी बड़ी बातें चल रही है किंतु कुछ ख़बरें ऐसी भी है जिनकों मीडिया नही दिखा पाता एक ऐसी ही सनसनीखे़ज़ ख़बर को सुनकर और देखकर समृृद्व भारत न्यूज़ टीम का मानों दिल दहल गया हो यह ख़बर थी दिल्ली के गाज़ीपुर पलाईओवर के नीचे बैठे प्रवासी मजदूरों की बेहाली की, जिसे राजनीतिक पार्टीयों के नेतागण जिसमें दिल्ली की वर्तमान सरकार के नेतागणों और कार्यकताओं ने उन लोगो की मदद करने के नाम पर सरकार द्वारा दी गई गाईडलाइन की जो धज्जियां उड़ाई देखने की बात थी। हैरानी तब हुई जब हमारे कैमरे में यह कैद हो गया कि दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौधरी जब यहां पर उन प्रवासियों की मदद चाहे वो चप्पल पहना कर या खाना देकर आदि से तमाम गाईडलाईन को मददेनज़र रखते हुए कर रहे थे कि अचानक पुलिस ने उनकों एक दिन के लिए उनके ही निवास स्थान पर नज़रबंद कर दिया किंतु जब वर्तमान सरकार के कार्यकताओं और नेताओं ने सारी नीतियों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई तो मानों मौन व्रत हर ओर दिखाई देने लगा।
वाह री छिछोरी राजनीति तू अपना आकार यहां तक बढ़ायेगी पता न था। इन प्रवासियों में बच्चे, बूढे़, महिलाये हर उम्र के लोगो का समावेश था, समूह में ऐसी ही दो या तीन वर्ष की एक छोटी सी बच्ची दिखाई दी हमारे सवांददाता ने उस बच्ची से बात करनी चाही तो मानों एक बिजली सी कचौंध गई हो पर उस मासूम को कुछ नही पता कि उसके मां बाप किस तरह भूखे रहने को मजबूर है। इन प्रवासियों को खाने की जरूरत थी, पहनने के लिए कपड़े, पैरों में चप्पलों की जरूरत थी, नंगे पैरों में छाले पड़ गये थे, त्वचा कट गई थी, घाव हो गये थे, एक ही सवाल की निर्णय लेते वक्त क्या इस वर्ग की बिल्कुल याद नही आई प्रशासन की यह कैसी अनदेखी है कि यह वो तबका है जिसने कभी महल तो कभी अलग अलग आशियानों, बिल्डिग आदि का निर्माण करते वक्त अपना खून पसीना बहाया है।
समृृद्व भारत न्यूज़ सरकार से अपील करता है कि ऐसे लाचार प्रवासियों या लोगों की भलाई के लिए ऐसे कदम उठाऐ ताकि उनका भरोसा हमारे देश की सरकारों पर हमेशा बना रहें।
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#NEWS REPORT: Samridh Bharat
#Posted By: Sparsh Gaurav
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